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शुभ-भ्रमण

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शुभ-भ्रमण

8 जून 2013

एक मुक्तक इंसानियत के लिए


वज्न  2212/2212/2212/22 



इंसान बन इंसानियत का दम भरे जाओ

इंसान हो इंसान की पीड़ा हरे जाओ

इंसान में इंसानियत को जिन्दा रहने दो

पशुता कलंकित कर न दे इतना डरे जाओ 

                                         -गीतिका 'वेदिका'

                                           8/6/2013 12:10 पूर्वान्ह  

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा सोमवार (10-06-2013) के चर्चा मंच पर लिंक
    की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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    1. आपने इतनी अच्छी सुचना दी ! आपका आभार सरिता जी!

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  2. उत्तर
    1. आपको काव्य के विचार खूबसूरत लगे ! आपका हार्दिक आभार !

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  3. आज की सोच पर सटीक बात

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    1. शौर्य जी! मेरा रचना सार्थक हुयी आपकी सराहना से । स्नेह बनाये रखिये।

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विचार है डोरी जैसे और ब्लॉग है रथ
टीप करिये कुछ इस तरह कि खुले सत-पथ