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26 जून 2013

हिन्द की सेना को समर्पित -मुक्तक





हिन्द की सेना को समर्पित मुक्तक १२२२/ १२२२/ १२२२/ १२२२

यही सच आज मानवता का तुम वरदान हे! सेना 
कि तुम विपदा में आये आदमी की जान हे! सेना 
कि शिव तो एक जो कैलाश में चुपचाप बैठे है 
कि तुम हो सत्य सुंदर और शिव भगवान् हे! सेना 




                                           -गीतिका वेदिका

11 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. सही कहते है आप आदरणीय शास्त्री जी! हमने देख ही लिया है जैसे अभी उत्तराखंड आपदा इसका ताजातरीन और सशक्त उदाहरन रही.
      नमन सेना को!!

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  2. सेना की बहादुरी को दर्शाता मुक्तक , आभार

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    उत्तर
    1. आपका शुक्रिया शौर्य जी! आपने रचना को सराहा!!

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  3. उत्तर
    1. सचमुच आशीष जी! सेना का योगदान मानवता के प्रति बहुत सुंदर और श्रेष्ठ है,, रचना तो केवल फूल में एक पंखुरी के समान है उनको अर्पण!!

      स्नेह बनाये रखिये!!

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  4. बहुत खूब "आदरणीया..गीतिका जी "

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  5. bane tum aapdaaa me aadmi ki jaan hey! sena...

    ab muktak ki matraayen sahi ho gyi... poora shi tha jara sa ghalat tha to socha bata dun... gustakhi maaf... rachna pyari hai...

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    उत्तर
    1. आभार धीरेन्द्र जी!
      किन्तु मुझे तो उल्लेखित पंक्तियों में दोष नही दिखा।
      ब्लॉग पर आपका आना अच्छा लगा।
      पुन: आभार

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  6. Aapki rachnaye dil ko chhu jati hain. in utkrisht rachnao ke ke liye anekanek dhanyawad.

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विचार है डोरी जैसे और ब्लॉग है रथ
टीप करिये कुछ इस तरह कि खुले सत-पथ