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शुभ-भ्रमण

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शुभ-भ्रमण

24/04/2013

विरह क्या आत्म दाह होता ...!

विरह क्या
आत्म दाह होता ...!

अश्रु अतिथि से आते है
स्वागत हे! नैना गाते है
हा ! पीड़ा, हा ! करुण रागिनी
सबको दूँ न्योता ...!

विरह क्या आत्म दाह होता ...!

स्मृतियाँ फेरे लेती है
घड़ी घड़ी घेरे लेतीं है
हा ! विदाई, हा ! वियोग; इस
क्षण, शुभ विवाह होता ...!

विरह क्या, आत्म दाह होता ...! 

                       गीतिका 'वेदिका'
                       11/04/06 6:45 अपरान्ह 

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